Popular Posts

सोमवार, 16 जुलाई 2018

उन क्षणों में जब तुम्हारी गोद में,
उन क्षणों में जब तुम्हारी गोद में।।

उन क्षणों में जब तुम्हारी गोद में,
संसार से ऋण मुक्त हो कर मै, ..........
नयनों के सागर  को देखूंगा, ........
न जानोगी मैं कितना हार्दिक कृतकृत्य हूँगा!!

सर्प सी लिपटी जटाएं
जब गगन को ढांप लेंगी।
सर्प सी लिपटी जटाएं जब गगन को ढांप लेंगी ,
बादलों की उस निराली चाल पर मैं मुग्ध हूँगा।।.....

जिनके पर्दे से छिटकती ...
चांदनी विश्राम देगी।
जिनके पर्दे से छिटकती चांदनी विश्राम देगी,
वर्षों से प्यासे पथिक को सौम्यता का पान देगी।।

आज मैं उस चांदनी के
भव्य दर्शन को विकल हूँ।
आज मैं उस चांदनी के भव्य दर्शन को विकल हूँ ,
प्राण में जो चेतना दे, उस सुधा रस को विकल हूँ।।

कुछ क्षणों में आ रही
आंधी का अब आभास भी है,
कुछ क्षणों में आ रही आंधी का अब आभास भी है,
जो उड़ा लेगी लटें और शांत मुख होगा प्रदर्शित।।

फिर कहाँ तुम मुझको देखोगे,
कहाँ मैं तुम को देखूंगा ?
फिर कहाँ तुम मुझको देखोगे, कहाँ मैं तुम को देखूंगा ?,
मैं उसकी गोद में ऋण मुक्त होकर, एक नया संसार देखूंगा।।

न जानोगी वही पल.. 
जन्म-जन्मों के सबर का....
न जानोगी वही पल, जन्म-जन्मों के सबर का,
धैर्य का, संतोष का, संघर्ष का उत्सर्ग होगा।।

आज मैं उस चांदनी के
भव्य दर्शन को विकल हूँ।
आज मैं उस चांदनी के भव्य दर्शन को विकल हूँ।
प्राण में जो चेतना दे, उस सुधा रस को विकल हूँ।। 
 
उन क्षणों में जब तुम्हारी गोद में,
उन क्षणों में जब तुम्हारी गोद में।।
 

शनिवार, 14 जुलाई 2018

स्वच्छता अभियान -
स्वच्छ  भारत  का  निर्माण
 
यह  चाहते तो  हैं  सभी  माहौल  अच्छा  चाहिये।
हर  गाऊँ  अच्छा  चाहिये, हर  शहर अच्छा  चाहिये।।
सुंदर  गली  बाज़ार  हो , सुंदर नदी  तालाब  हो.
सुंदर  गगन ,  सुंदर  धरा , सुंदर  प्रभा  का  ख़्वाब  हो ।।
है  मगर  कुछ  और  भी  जो  सब  जनो  में  चाहिये।
 चाह  केवल  स्वच्छता  की  हो , प्रयत्न  भी  चाहिये।।
हैं  जो  यह  सब  जानते , उनसे   मेरी  यह अर्ज़  है।
अपने  घरों  की  छत  के  नीचे  देखें  कैसी  फ़र्श  है।।
साफ़ आँगन  है  हमारा , साफ़  पिछवाड़ा  है  क्या।
घर  के  चारों  ओर  रहता  पेड़ों  का  पहरा  है  क्या।।
है अगर  दामन  हमारा  मैल  से  लिपटा  नहीं।
मन  हमारा  द्वैष  के  दुर्भाव  से  जकड़ा  नहीं।।
फिर  कहाँ  रोकेगा  कोई  हमको  बढ़ने  से  कभी।
स्वच्छ  पर्यावरण  के  हित  चल  पड़ें  आगे  सभी।।
संकल्प  लें  हर  वर्ष  हम  दो - चार  पौधे  रोप  दें।
जंगलों की दुर्दशा जो हो ही वह रोक  दें।।
फूल - फल  के  पेड़  रोपें वृक्ष छायादार  हों।
दो  तरफ  सड़कों  के  जैसे  सब्ज़  पहरेदार  हों।।
लहलहाते  खेत  हों  और झूमती  सी  ब्यार  हो।
स्वच्छ  पर्यावरण  में  रमणीक घर  तैयार  हों।।
पेड़  पोधों  की  हिफ़ाज़त  से  हमारा  प्यार  हो।
उस  प्रभु  की  भेंट  को  पाने  के  हम  हक़दार  हों।।
मैल  और  कचरे  की  शुद्धी  की  नई  तकनीक  हो।
शीघ्र  ही अब  स्वच्छ  भारत  की  नई  तामीर  हो।। 
 

कुछ सीखो

केले के छिलके को भैया रस्ते में न फेंको,
इस पर से कोई फिसलेगा उसको भी तो देखो।
वहां के सारे लोग हंसेंगे, उसको देंगे ताना ,
चलने की  जो शिक्षा चाहिए, तुम फौजी बन जाना।
बेचारा तो उठ न सकेगा, कहेगी पीड़ा "चीखो"
लोग वहाँ  पर यही कहेंगे "चलना तो भैया सीखो"
मुँह पीला कर के हँस  देगा, उठेगा लाज के मारे,
कहेगा "तुम सब सच्चे हो, हैं सारे दोष हमारे"।
खून का घूँट पियेगा मन में, भावुक हो रोने को,
नहीं सहारा देगा फिर भी उसे खड़ा होने को।
स्वयं पूछ लो ह्रदय से अपने, रहा है क्या कहने को,
मेरी तरह ही कहोगे तुम भी सभी से यह कहने को,
केले के छिलके को भैया रस्ते में न फेंको,
इस पर से कोई फिसलेगा उसको भी तो देखो"।