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शनिवार, 28 जुलाई 2018

अब आवश्यक है मृदा स्वास्थ्य कार्ड आधारित  सिफारिशों पर उर्वरक और पौध पोषक तत्वों का फसलों में उपयोग करना  

मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के नेशनल मिशन ऑन सस्टेनेबल एग्रीकल्चर (नमसा) के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण और  अत्यंत महत्त्वाकांक्षी योजना है। इस योजना का शुभारंभ १७ फरवरी २०१५ को माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने राजस्थान के सूरतगढ़ में किया। श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि अगर किसान इसे अपना लेते हैं तो प्रति तीन एकड़ में कम से कम ५० हजार रूपये  बचा सकते हैं। खेती बाड़ी का तरीका मृदा की गुणवत्ता पर निर्भर होना चाहिए।

इस योजना के अंतर्गत किसानों को उनके खेतों में बोई जाने वाली फसल के लिए आवश्यक पोषक तत्वों और उर्वरकों को उपयोग करने की सलाह प्रयोगशाला में मिटटी के नमूने की जाँच के आधार पर प्राप्त नतीजे के मुताबिक ही दी जाती है, ताकि किसान अच्छी पैदावार का लाभ उठा सकें।

कृषि विभाग के अधिकारी एवं प्रचार - प्रसार कार्यकर्ता पिछले ४ वर्षों से इस विषय में किसानों को जाग्रत करते रहे हैं।  अपने निजी एंड्राइड मोबाइल फोन की सहायता से उन्होंने खेतों की मिटटी के उपयुक्त नमूने अक्षांश और लोंगिट्ठे ढूंढ कर इकठा किये हैं और विश्लेषण के लिए प्रयोगशाला में भी दिए। वैज्ञानिक ढंग से लाखों की संख्या में अन्य प्रांतों की तरह जम्मू कश्मीर राज्य में भी इन मिटटी के नमूनों का विश्लेषण हुआ। योजना के दिशा निर्देश अनुसार लगभग १० गुना की संख्या में किसान परिवारों के बीच इन  नतीजों  का ब्यौरा मृदा स्वास्थ्य कार्ड (साइल हेल्थ कार्ड्स) में दर्ज किया गया और फिर इन साइल हेल्थ कार्ड्स का वितरण भी हुआ।

विश्लेषण के द्वारा मिटटी में मौजूद पोषक तत्वों की मात्रा  और बोई या रोपी जाने वाली फसल में कितनी खाद और पोषक तत्वों का उपयोग करना है इसका पता भी चल जाता है ।  किसानों को खेत की मिट्टी की प्रकृति की जानकारी भी मिलती है।

पहले तो सरकार का लक्ष्य सभी किसान परिवारों को ३ वर्षों में कवर करने का था परन्तु फिर इसे घटा कर २ वर्ष ही कर दिया गया।  इस तरह से मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना  का पहला चक्र २०१६--१७ में पूरा हुआ और अब दूसरा शुरू हो गया है।  आशा तो बंधी है की सरकार के प्रयासों से और कृषि विषेशज्ञों के योगदान  से किसानों को मिट्टी की गुणवत्ता का अध्ययन करके एक अच्छी फसल प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।

इस योजना के अंतर्गत सरकार का प्रति २ साल के अन्दर पूरे भारत में लगभग 14 करोड़ किसानों को यह कार्ड जारी करने का लक्ष्य रखा गया है। इस कार्ड में एक विवरण छपता है जो किसानों को अपने खेत या जमीन के लिए २ साल में एक बार दिया जाना चाहिए । इस योजना के अंतर्गत मोबाइल मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएंस्थापित करने के लिए रूपये आबंटित भी किये गये हैं, ताकि किसानों को सही परीक्षण की सुविधा मिल सके और खेतों में फसलें लहलहा सकें। मृदा स्वास्थ्य कार्ड में किसी खेत विशेष की मृदा का ब्यौरा होता है कि कौन-कौन से पोषक तत्व कितनी मात्रा में हैं और उसमें बोई गई फसलों को किस मात्रा में कौन सा उर्वरक दिया जाना चाहिए।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के पहले दो वर्षीय चक्र (२०१५-१७) में ३१ मई २०१७  तक २.५३ करोड़ लक्षित नमूने एकत्र किये गये थे और २.२२ करोड़ (९३  प्रतिशत) नमूनों का परीक्षण किया गया था । लगभग १०.७४ करोड़ लाभार्थियों के लिये ये कार्ड भेजे गए थे और ०६.०३ करोड़ कार्ड सम्बंधित पोर्टल पर पंजीकृत भी किये गए थे। 

दुसरे दो वर्षीय चक्र (२०१७-१९) के लक्ष्य २.४४ करोड़ एकत्रित मृदा स्वास्थ्य कार्ड में से १.३० करोड़ नमूनों का विश्लेषण किया जा चुका है ।  लगभग ४.२४ करोड़ लाभार्थियों में वितरण के लिये ये कार्ड भेजे गए हैं और लगभग ०३.९० करोड़ कार्ड सम्बंधित पोर्टल पर पंजीकृत कर दिए गए हैं।

इतनी बड़ी उपलब्धियों के बावजूद यह देखा गया है कि जिस अभिप्राय (मक़सद) से यह नई मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना लागू की गई है उसे वास्तविक रूप से प्राप्त करने  में (किसानों द्वारा अपने खेतों में उपयोग करने में) अभी बहुत समय लगेगा। अभी लगभग न के बराबर किसान लोग मृदा स्वास्थ्य कार्ड की सिफारिश के आधार पर अपनी फसलों में उर्वरकों और पोषक तत्वों का प्रयोग कर रहे हैं। अभी भी बहुत से किसान हैं जिनके कार्ड तो बने हुए हैं परन्तु उन्हें इनकी उपयोगिता , उत्पादकता और आर्थिक लाभ के बारे में विशेष जानकारी नहीं है। यदि है, तो भी इसे नज़र--अंदाज़ कर रहे हैं। कुछ ऐसे किसान भी हैं जिनके कार्ड बने भी हैं पर उन तक ये पहुंचे नहीं हैं और कुछ और किसान हैं जिनके साइल हेल्थ कार्ड अभी बने ही नहीं हैं।

मृदा परीक्षण कार्यक्रम कृषि विभाग की योजना में पहले भी शामिल था।  अब जो इस पर इतना बल दिया गया है तो इसके परिणाम साफ़ तौर पर नज़र आने चाहियें। किसानों को उर्वरक और पौध पोषक तत्वों का उपयोग इनकी सिफारिश के आधार पर ही करना चाहिए। सरकार द्वारा इस कार्यक्रम का मूल्यांकन करते रहना चाहिए, आवश्यक धन राशि का आबंटन समय पर करना चाहिए और इसे कार्यान्वयन में लाने के लिए पर्याप्त प्रदर्शन (डेमोंस्ट्रेशन प्लाट) किसान के खेत पर लगवाने चाहियें । सफल किसानों की कहानियां भी प्रसारित और प्रचारित की जानी चाहियें और परिणाम प्रत्यक्ष दिखाने चाहियें जिस से अन्य सभी किसान इस ओर प्रेरित हो सकें।

(सी.एम्.शर्मा)

गुरुवार, 26 जुलाई 2018


 
 सभ्य समाज का परिचय दें: प्रदूषण को न्यूनतम और हरियाली को अधिकतम रखें। 
 
 हिमालय से स्थिर पर्वत अपनी चोटियां और दामन कटा कर, पेड़-पौधे अपना अस्तित्व मिटा कर, खेत-खलिहान अपना व्यास घटा कर बढ़ती हुई जनसँख्या के लिए विकास की बलिवेदी पर हमारी आने वाली संतानों के लिए स्वयं को लुटा रहे हैं और हम खुश हो कर यह कीमत देने के लिए तैयार हैं, इस बात से अनभिज्ञ की कि हम परमात्मा के वरदान को तुच्छ समझ कर ठुकरा रहे हैं और असंतुलित तोड़-जोड़ को उन्नति कह रहे हैं।
 
अमेरिका, चीन, जापान, जैसे विश्व के तथाकथित बड़े-बड़े देशों की नक़ल करते हुए हमने भी बड़ी-बड़ी सड़कें, पुल, बहुमंज़िला इमारतें, बाजार और न जाने क्या-क्या बनाना शुरू किया है। परन्तु जम्मू शहर से अखनूर की तरफ जाने वाली दो लाइन वाली सड़क का चार लाइन की सड़क में परिवर्तित होने वाले काम की शुरुआत में कुर्बान होते हुए असंख्य विशालकाय सायादार और सूंदर पेड़ों को देख कर मन में जो दुःख हुआ, वह कहा नहीं जा सकता। कुछ पेड़ इनमे सड़क की ओर ज़्यादा झुके हुए थे और आंधी तूफ़ान में घातक भी हो सकते थे परन्तु शेष तो हरे, फूलवाले और मनमोहक थे। माना कि विकास-यात्रा में ये बाधक थे परन्तु प्रकृति-प्रेमियों को इनकी कमी तो खलती रहेगी। बहुत से लोग यह भी पूछ रहे हैं की क्या सरकार के पास इनकी भरपाई करने का कोई प्रोग्राम भी है या फिर निरीह जनता को खुली धुप और वर्षा के सहारे छोड़ दिया जाएगा। अभी बहुत से सरकारी काम्प्लेक्स जम्मू में बने हुए हैं जहाँ खुली जगह भी  है, पेड़-पौधे भी हैं लेकिन देख भाल के आभाव में वे या तो वे गल-सड़ रहे हैं या भेद-बकरी की भेंट हो रहे हैं। 
 
पिछले दिनों पर्यावरण, बाल एवं महिला विकास, शिक्षा एवं कृषि को समर्पित संसथान "समीक्षा" के एक प्रतिनिधि मंडल ने जिसकी अध्यक्षता श्री अजय खजुरिआ (पूर्व डी.सी) कर रहे थे, इस विषय में जम्मू के संभाग आयुक्त श्री संजीव वर्मा से बात-चीत की। प्रतिनिधिमंडल में सरकारी सेवा से निवृत्त हुए प्रमुख व्यक्ति मेंबर के रूप में शामिल थे सर्व श्री जिया लाल शर्मा (पूर्व बागबानी निदेशक), विनोद मल्होत्रा (शहर नियोजक), सी.एम्.शर्मा (कृषि विशेषज्ञ), करतार सिंह (पूर्व तहसीलदार), रोहित खजुरिअ (वित्त विशेषज्ञ) और सुभाष अन्तल (प्रशासन विशेषज्ञ)। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि इस चार लाइन वाली सड़क को बनाते समय रणबीर नहर और सड़क के दरमियान पर्याप्त हरित क्षेत्र, गंदी शहरी नालियों के निकास, बिजली की तारों, पानी की पाइपों, टेलीफोन की तारों, गाड़ियों के रुकने के स्थानों और सर्विस सड़कों की सुचारु व्यवस्था समेकित ढंग में पहले से ही की जानी चाहिए। श्री विनोद मल्होत्रा ने ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि जम्मू - अखनूर सड़क  के साथ साथ बहती हुई रणबीर नहर देश भर में बर्फ से ठन्डे पानी वाली एकमात्र नहर है जो पिछले ११५ वर्ष से वास्तव में जम्मू की जीवन रेखा बनी हुई है परन्तु आज फैलते हुए जम्मू शहर के दबाव में घुटन और प्रदूषण के कगार पर है।  यदि इस के संरक्षण पर पर्याप्त ध्यान न दिया गया तो वह दिन दूर नहीं जब यह एक गंदे नाले में परिवर्तित हो जाएगी और जम्मू की धरोहर लुप्त हो जाएगी। यह भी आग्रह किया गया कि रणबीर नहर सिंचाई और पण-बिजली परियोजना के साथ साथ सैलानियों के मनोरंजन के लिए विशेष दर्जा प्ऱप्त कर सकती है बशर्ते इसका सुधार एवं प्रबंधन स्मार्ट सिटी के अनुरूप योजनाबद्ध और एकीकृत तरीके से हो। इसमें समीक्षा ने अपनी ओर से पूरे सहयोग और वांछित सेवा का आश्वासन दिया। श्री संजीव वर्मा (आई.ऐ.एस.) ने संस्था के सुझाव और चिंताओं का पूरा संज्ञान लिया। उन्होंने जम्मू डेवलपमेंट अथॉरिटी के वाईस चेयरमैन श्री अरविन्द कोतवाल और सड़क निर्माण के लिए नियुक्त संसथान के जनरल मैनेजर श्री विजय को समीक्षा द्वारा उठाए गए मुद्दों को ध्यान में रखने के लिए निर्देश दिए और आश्वासन भी दिया की समीक्षा सोसाइटी द्वारा उठाए गए सभी विचारयुक्त मुद्दे यथासम्भव तरीके से संज्ञान में लिए जाएंगे।
अपनी तरफ से समीक्षा संसथान ने इस सप्ताह जम्मू क्षेत्र को हरा भरा रखने के उद्देश्य से एक वृक्षारोपण अभियान मुठी स्थित जम्मू रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी के अध्यक्ष, डॉ. कुलभूषण शर्माके सहयोग से चलाया। इसमें सामाजिक वनयिकी विभाग जम्मू के सौजन्य से बिलपत्री, बरगद, पीपल, जामुन, टीकौमा और गुलमोहर के लगभग ५० पौधे संग्रामपुर पंचायत में टिकरी खेनि की शमशान भूमि और भगवन काली बीर के मंदिर के सामने कम्युनिटी हॉल के प्रांगण में रोपे गए। अभियान में श्री अजय खजुरिअ, डॉ. यु.के.मेहता (उपाध्यक्ष समीक्षा), सर्व श्री जिया लाल शर्मा, सी.एम्.शर्मा, रोहित खजुरिआ, सुभाष अन्तल, संग्रामपुर पंचायत के पूर्व सरपंच श्री अश्वनी शर्मा, दुर्गो चक के पूर्व पांच श्री मंगल दस्, और गाओं के प्रमुख नागरिकों सर्व श्री शाम लाल, रवि दत्त, रमेश कुमार, दीपक कुमार, सुभाष शर्मा, ने कार्यक्रम में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। सभी उपस्थित स्वयं सेवकों ने ऐसा अभियान जारी रखने और पौधों की हिफाज़त करने की प्रतिज्ञा भी ली। इस अवसर पर वहां बिखरे पड़े प्रदूषण फैला रहे प्लास्टिक और पॉलिथीन के चीथड़े भी इकठा किये गए। समीक्षा द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस (५ जून २०१८ ) को बीट प्लास्टिक पोल्लुशण के नाम से जो अभियान साम्बा जिला के उत्तरबेहनी देवस्थान से छेड़ा गया था यह उसी की पुनरावृति थी।
हमें आशा है कि विकास की आवश्यकताओं को पूरा करते समय हम लोग एक सभ्य समाज का परिचय देते हुए प्रदूषण को न्यूनतम स्तर पर लाने का पूरा प्रयास हर स्तर पर हर स्थान पर और हर समय पर करेंगे। अपनी अनमोल संस्कृति और धरोहर को देश की सम्पदा के रूप में संजो कर रखेंगे और हरियाली को छोटे से ले कर बड़े, प्रत्येक प्राणी के लिए पर्याप्त मात्रा में बढ़ते रहेंगे। वर्षा ऋतु इस के लिए उपयुक्त समय है।
                                                            (सी.एम्.शर्मा )