Popular Posts
-
नेकी नेकी कर कुएं में डाल मेहनत कर, न कर मलाल। सजग हमेशा सिरजन-हार, दीनों का करता उद्धार। नेकी कर कुएं में डाल।। १। ...
-
एरोमा मिशन - सुगंध युक्त पौधों की खेती, प्रसंस्करण,मूल्य संवर्धन एवं विक्रय द्वारा ग्रामीण स-शक्तिकरण के प्रयास भारत की वैज्ञानिक तथा औद्...
-
MEDITATION (It makes the blind see and the lame stride over the hills) Dr. Ashwini Jojra is a versatile personality of Jammu region. Someh...
-
रक्षा करो रक्षा करो, रक्षा करो। रक्षा करो, रक्षा करो। रघुपति मेरे राजाराम, रक्षा करो।। बख्शो मुझे, बख्शो मुझे। बख्शो मुझे, बख्शो म...
-
During the period of His banishment to the woods from Ayodhya, Bhagwan (Lord) Shri Ram stayed for a while in the hamlet of Rishi (Saint) B...
-
मन पक्षी जब से नीड़ के बाहर मैने पाँव रखा है , पंखों को सपनों की बस्ती में दर - दर उड़ता पाया है। चिर ...
-
आनंद करो और राज्य करो हम स्वस्थ बनें और श्रेष्ठ बनें , आदर्श बनें दुनिया के लिए। आओ सब मिल संकल्प करें कुछ त्याग करें दुनिया के लिए। ...
-
शिकायत हिन्दू से शिकायत है "क्यों अब तक हिन्दू बना नहीं?" मुस्लिम से भी यही प्रश्न है "क्यों वह मुस्लिम बना नहीं:...
-
कुछ सीखो केले के छिलके को भैया राहों में न फेंको, इन पर से कोई फिसलेगा उसको भी तो देखो। वहां के सारे लोग हंसेंगे, उसको देंगे त...
रविवार, 14 अक्टूबर 2012
शनिवार, 6 अक्टूबर 2012
आनंद करो और राज्य करो
हम स्वस्थ बनें और श्रेष्ठ बनें ,
आदर्श बनें दुनिया के लिए।
आओ सब मिल संकल्प करें
कुछ त्याग करें दुनिया के लिए।
उत्तम है सबसे त्याग समय का
दींन -दुखी जनता के लिए,
हम खैर-ख़बर उनकी पूछें
कुछ वक़्त निकालें उनके लिए ।.
रोग ग्रस्त जो प्राणी हैं
निर्धन, बे-घर, अज्ञानी हैं,
आओ हम उनकी मदद करें
सम्भाव दिलों में उदीप्त करें।।
यह जीवन दर्द भरा है बहुत
इसमें सुख की इच्छा है प्रबल,
आओ सुख के पल-छिन बाँटें
सम-भ्रात्र भाव से आगे बढ़ें।।
ये दया के सागर मंदिर-मस्जिद,
गुरूद्वारे और गिरीजाघर ,
अर्पित कर दें अपने संसाधन
संताप से जग को मुक्त करें।।
प्रभु ने बहुत दिया है हमें
हम दान करें निज सुख के लिए।
संतोष की धारा पीने को
हम प्रेम की गंगा बहाते रहें।।
बच्चो, तुम कल के शासक हो
संसार के भाग्य-विधाता हो।
संकल्प करो, नेकी पर चल कर---
( न्याय की खुली व्यवस्था में---)
आनंद करो और राज्य करो,
आनंद करो और राज्य करो।।
(15 अगस्त 2011)
हम स्वस्थ बनें और श्रेष्ठ बनें ,
आदर्श बनें दुनिया के लिए।
आओ सब मिल संकल्प करें
कुछ त्याग करें दुनिया के लिए।
उत्तम है सबसे त्याग समय का
दींन -दुखी जनता के लिए,
हम खैर-ख़बर उनकी पूछें
कुछ वक़्त निकालें उनके लिए ।.
रोग ग्रस्त जो प्राणी हैं
निर्धन, बे-घर, अज्ञानी हैं,
आओ हम उनकी मदद करें
सम्भाव दिलों में उदीप्त करें।।
यह जीवन दर्द भरा है बहुत
इसमें सुख की इच्छा है प्रबल,
आओ सुख के पल-छिन बाँटें
सम-भ्रात्र भाव से आगे बढ़ें।।
ये दया के सागर मंदिर-मस्जिद,
गुरूद्वारे और गिरीजाघर ,
अर्पित कर दें अपने संसाधन
संताप से जग को मुक्त करें।।
प्रभु ने बहुत दिया है हमें
हम दान करें निज सुख के लिए।
संतोष की धारा पीने को
हम प्रेम की गंगा बहाते रहें।।
बच्चो, तुम कल के शासक हो
संसार के भाग्य-विधाता हो।
संकल्प करो, नेकी पर चल कर---
( न्याय की खुली व्यवस्था में---)
आनंद करो और राज्य करो,
आनंद करो और राज्य करो।।
(15 अगस्त 2011)
रक्षा करो
रक्षा करो, रक्षा करो।
रक्षा करो, रक्षा करो।
रघुपति मेरे राजाराम,
रक्षा करो।।
बख्शो मुझे, बख्शो मुझे।
बख्शो मुझे, बख्शो मुझे।
बख्शो दुर्व्यस्नों से बख्शो मुझे।
मेरा ह्रदय है अस्थिर बहुत,
न जाने कहाँ जाए दृष्टि बिखर।
मुझे डाल दो साधना की डगर।
रक्षा करो, रक्षा करो।।
रक्षा करो, रक्षा करो;
रघुपति मेरे राजाराम,
रक्षा करो।।
स्वाधीन हो मेरे मन का भ्रमर,
कभी घुट के तड़पे न परबस बन कर।
हनुमान भेजो, जला दो नगर,
गिरा दो ये ऊँचे अहम् के शिखर।
सिया-राम भक्ति का वरदान दो,
रक्षा करो, रक्षा करो।।
रक्षा करो, रक्षा करो,
रघुपति मेरे राजाराम,
रक्षा करो।।
यह जीवन न जाने कहाँ से चला,
न जाने कहाँ तक चला जाएगा।
मिले राह में कौन, बिछ्डेगा कौन,
कहाँ शब्द उभरेंगे, कब होगा मौन।
वरद हस्त से मेरी रक्षा करो,
रक्षा करो, रक्षा करो।।
रक्षा करो, रक्षा करो,
रघुपति मेरे राजाराम,
रक्षा करो।।
(20-10-2011)
रक्षा करो, रक्षा करो।
रक्षा करो, रक्षा करो।
रघुपति मेरे राजाराम,
रक्षा करो।।
बख्शो मुझे, बख्शो मुझे।
बख्शो मुझे, बख्शो मुझे।
बख्शो दुर्व्यस्नों से बख्शो मुझे।
मेरा ह्रदय है अस्थिर बहुत,
न जाने कहाँ जाए दृष्टि बिखर।
मुझे डाल दो साधना की डगर।
रक्षा करो, रक्षा करो।।
रक्षा करो, रक्षा करो;
रघुपति मेरे राजाराम,
रक्षा करो।।
स्वाधीन हो मेरे मन का भ्रमर,
कभी घुट के तड़पे न परबस बन कर।
हनुमान भेजो, जला दो नगर,
गिरा दो ये ऊँचे अहम् के शिखर।
सिया-राम भक्ति का वरदान दो,
रक्षा करो, रक्षा करो।।
रक्षा करो, रक्षा करो,
रघुपति मेरे राजाराम,
रक्षा करो।।
यह जीवन न जाने कहाँ से चला,
न जाने कहाँ तक चला जाएगा।
मिले राह में कौन, बिछ्डेगा कौन,
कहाँ शब्द उभरेंगे, कब होगा मौन।
वरद हस्त से मेरी रक्षा करो,
रक्षा करो, रक्षा करो।।
रक्षा करो, रक्षा करो,
रघुपति मेरे राजाराम,
रक्षा करो।।
(20-10-2011)
सदस्यता लें
संदेश (Atom)