होली आई, होली आई
होली आई, होली आई
इस फाल्गुन फिर होली आई,
बरसों बीते निर्जन-मन में
प्रेम झड़ी फिर होली लाई ।।
होली आई, होली आई
इंद्रधनुष लाया आकाश
कभी सघन घन, कभी प्रकाश,
धरा पे महके तरुवर फूल
प्रेम सुधा संग होली आई।
होली आई, होली आई
बच्चों ने हुड़दंग मचाया,
बछड़ों ने भी खूब छकाया,
कुदरत रही है झूला झूल,
रंगों के संग होली आई।
होली आई, होली आई
विद्यालय में छुट्टी है,
फिर भी कहीं न सुस्ती है।
गाँव-शहर में जमा है रंग,
उत्साह के संग होली आई।
होली आई, होली आई
मुश्किल से अवकाश मिला है,
देखो तो, क्या रूप खिला है,
राखो प्रभु जी जन की टेक
होला के संग होली आई।
होली आई, होली आई
रंग भरो, मारो पिचकारी ,
गुस्सा छोडो, दो किलकारी,
निर्बल को बाहों से उठाओ
साहस के संग होली आई।
होली आई, होली आई
हंसी-ख़ुशी से काम चलाओ,
रंग-रंग बिखराते जाओ,
बैर-द्वेष हो बीती बात,
शुचिता संग होली आई।
होली आई, होली आई
(सी.एम. शर्मा )
नैसर्गिक होली
रंगों के प्रेमी,
जहाँ हो - जैसे भी हो,
छोड़-छाड़ कर गाउँ - शहर
सब दौड़े आओ।
जितने भी हैं रंग धरा पर
और गगन में,
आँखों से चुन लो
ह्रदय में भरते जाओ।।
यह देखो
सरसों के पीले खेत खिले हैं,
श्याम-हरित भू-भाग
नदी-नालों से सिले हैं।
आसमान भी खुश है,
धरती नहा रही है,
धूप बादलों के पीछे से
झाँक रही है।।
छन कर आती
देवदार के झुरमुट में से,
सूरज की किरणें है -
रंग गुलाबी जिनका।
ताक-झाँक कर रिम-झिम
बूंदों के संग गा कर,
अभिनन्दन करतीं हैं -
वे भी नव पल्लव-फूलों का।।
इधर देख लो
खुशियों के शृंगार पर्व पर,
धरती-अम्बर पर भँवरे -
गुञ्जार रहे हैं।
रंग-बिरंगी
पावन होली के अवसर पर
देते हैं सन्देश
विविधता में उत्सव का।।
आज प्रफुल्लित ह्रदय का
सबको खुला निमंत्रण,
नैसर्गिक पर्वत श्रेणी में
दौड़े आओ।
रंग यहीं हैं, काव्य यहीं है,
प्रीत यहीं है,
तन-मन से स्वागत है
होली के दिन सबका।।
(सी.एम. शर्मा )
होली आई, होली आई
इस फाल्गुन फिर होली आई,
बरसों बीते निर्जन-मन में
प्रेम झड़ी फिर होली लाई ।।
होली आई, होली आई
इंद्रधनुष लाया आकाश
कभी सघन घन, कभी प्रकाश,
धरा पे महके तरुवर फूल
प्रेम सुधा संग होली आई।
होली आई, होली आई
बच्चों ने हुड़दंग मचाया,
बछड़ों ने भी खूब छकाया,
कुदरत रही है झूला झूल,
रंगों के संग होली आई।
होली आई, होली आई
विद्यालय में छुट्टी है,
फिर भी कहीं न सुस्ती है।
गाँव-शहर में जमा है रंग,
उत्साह के संग होली आई।
होली आई, होली आई
मुश्किल से अवकाश मिला है,
देखो तो, क्या रूप खिला है,
राखो प्रभु जी जन की टेक
होला के संग होली आई।
होली आई, होली आई
रंग भरो, मारो पिचकारी ,
गुस्सा छोडो, दो किलकारी,
निर्बल को बाहों से उठाओ
साहस के संग होली आई।
होली आई, होली आई
हंसी-ख़ुशी से काम चलाओ,
रंग-रंग बिखराते जाओ,
बैर-द्वेष हो बीती बात,
शुचिता संग होली आई।
होली आई, होली आई
(सी.एम. शर्मा )
नैसर्गिक होली
रंगों के प्रेमी,
जहाँ हो - जैसे भी हो,
छोड़-छाड़ कर गाउँ - शहर
सब दौड़े आओ।
जितने भी हैं रंग धरा पर
और गगन में,
आँखों से चुन लो
ह्रदय में भरते जाओ।।
यह देखो
सरसों के पीले खेत खिले हैं,
श्याम-हरित भू-भाग
नदी-नालों से सिले हैं।
आसमान भी खुश है,
धरती नहा रही है,
धूप बादलों के पीछे से
झाँक रही है।।
छन कर आती
देवदार के झुरमुट में से,
सूरज की किरणें है -
रंग गुलाबी जिनका।
ताक-झाँक कर रिम-झिम
बूंदों के संग गा कर,
अभिनन्दन करतीं हैं -
वे भी नव पल्लव-फूलों का।।
इधर देख लो
खुशियों के शृंगार पर्व पर,
धरती-अम्बर पर भँवरे -
गुञ्जार रहे हैं।
रंग-बिरंगी
पावन होली के अवसर पर
देते हैं सन्देश
विविधता में उत्सव का।।
आज प्रफुल्लित ह्रदय का
सबको खुला निमंत्रण,
नैसर्गिक पर्वत श्रेणी में
दौड़े आओ।
रंग यहीं हैं, काव्य यहीं है,
प्रीत यहीं है,
तन-मन से स्वागत है
होली के दिन सबका।।
(सी.एम. शर्मा )