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बुधवार, 11 जुलाई 2018

एरोमा मिशन - सुगंध युक्त पौधों की खेती, प्रसंस्करण,मूल्य संवर्धन एवं विक्रय द्वारा ग्रामीण स-शक्तिकरण के प्रयास

एरोमा मिशन - सुगंध युक्त पौधों की खेती, प्रसंस्करण,मूल्य संवर्धन एवं विक्रय द्वारा ग्रामीण स-शक्तिकरण के प्रयास

भारत की वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद् पिछले छह दशक से देश सुगंध आधारित उद्योग में उपयोग होने वाले आवश्यक तेलों को विकसित करने और बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इस के फलस्वरूप हमारे उद्योगों, किसानों और उद्यमिओं के रोज़गार पाने और बढ़ाने के अवसरों में सतत वृद्धी होती रही है।  परिषद् की विभिन्न इकाईयां कुछ महत्त्वपूर्ण सुगंध युक्त फसलों की उन्नत किस्मों के विकास एवं आविष्कार करने में सफल रही हैं।  परिषद् की प्रयोगशालाएं अब तक एकाकी रूप से ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सुगंध क्षेत्र में प्रमुख योग-दान दे रही थीं।  परन्तु अब ग्रामीण अर्थ--व्यवस्था, बाजार की गतिशीलता और विकास के अवसरों को सही तरीके से उपयोग में लाने के लिए निर्णायक कदम उठाये जा रहे हैं।  करगत लिए हुए एरोमा मिशन द्वारा देश भर में ये कदम ऐसा परिवर्तन लाने में सक्षम हैं जिन से पर्याप्त मात्रा में सुगंध युक्त पौधों के उत्पादन से मूल्य संवर्धन तथा विपणन तक के कार्यक्रम एक कड़ी के रूप में जुड़ जायेंगे।

एरोमा मिशन का लक्ष्य है निम्नलिखित उद्देश्यों को प्राप्त करना :

१. देश के विभिन्न भागों के विशेष रूप से वर्षा आधारित और क्षारीय भूमि पर ५५०० हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्रफल में नगद आय देने वाले सुगंध युक्त पौधों को सुरक्षित खेती के अंतर्गत लाना ,
२. देश के किसानों तथा उत्पादकों को आसवन (डिस्टिलेशन) एवं मूल्य संवर्धन के लिए आवश्यक  तकनीक और आधारभूत सुविधा के लिए सहायता उपलब्ध करवाना ,
३. किसानों तथा उत्पादकों को उनके उत्पाद का सही दाम दिलवाने के लिए खरीद की असरदार व्यवस्था उपलब्ध करवाना ,
४. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार एवं अर्थव्यवस्था के अनुरूप पौधों से प्राप्त आवश्यक तेलों और सुगंध के अंश का मूल्य संवर्धन करना।

इस मिशन क्व केंद्र में वे फसलें हैं जिनसे आवश्यक तेल व सुगंधित रसायन प्राप्त होते हैं।  इन पर शोध और विकास कार्य सुगंध, स्वाद और खुशबू के अंतर्राष्ट्रीय माप-दंड पर खरा उतरने की दृष्टि से किये जाते हैं। वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद् अपनी प्रमुख प्रयोगशालाएं का अन्य सम्बंधित राजकीय एवं निजी प्रयोगशालाओं से समन्वय बिठाएगी और विकसित तकनीक को किसान एवं उद्योग जगत के हित में सांझा करेगी।  विज्ञान और तकनीक को आरम्भ से अंत तक उपभोक्ता, उद्योग, समाज और किसान तक पहुंचाने का यह प्रयास है जिस से व्यापार के अवसर, ग्रामीण विकास, और गुणवत्ता सुधार के लक्ष्य प्राप्त हो सके।

५५०० हेक्टेयर क्षेत्रफल में औषधीय एवं सुगंध युक्त पौधों की कॉस्ट से लगभग ६०,००० हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र का इस मिशन से जुड़ने का अनुमान है।  इससे बंजर पड़ी भूमि का भी सदुपयोग होगा और जंगली तथा चरने वाले पशुओं से फसलों का भी बचाओ होगा। किसान की आय भी बढ़ेगी।

अभी तक एरोमा मिशन के अंतर्गत जिन ९ बहुमूल्य सुगन्धित  पौधों की वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद् - आई..आई. आई.एम्म द्वारा २००० हेक्टेयर क्षेत्र में रोपाई के लिए कार्यक्रम तैयार किया गया है , वे हैं:
१ लेमन ग्रास (हाइब्रिड - सी. के. पि. २५; सी. पी. के. एफ २ - ३८),
२. रोसा ग्रास (आर.आर.एलल- जे; सी.ऍन ५ ), हिमरोज़ा (आई..आई. आई.एम्म - जे; सी. के. १०)
३. लैवेंडर लैवेंडुला ओफ्फिशनलिस (आर. आर. एल.-१२ )
४. रोज़मेरी रोज़मेरियांस ओफ्फिशनलिस
५. जम्मू मोनरडा - आई..आई. आई.एम्म - जे, एम्.सी. ०२)
६. सैल्विया स्क्लेरिअ
७. मेंथा लोंगीफोलिआ (आर.आर.एल .-जे,, एम..एल. ४ ), मेंथा पिपेरेटा (आर.आर.एल.-जे,  एम.टी ९४)
८. ओसिमम स्पीशीज ( आर.आर.एल .-औ जी-१४.; आर.आर.एल.-औ.बी.-१५.), और
९. पैलार्गोनियम ग्रावेओलेन्स जेरेनियम पी.जी.-आई..आई. आई.एम्म १०१ )

ये सभी पौधे सिंचित क्षेत्र में सही चलते हैं परन्तु रोसा ग्रास और पैलार्गोनियम वर्षा आधारित क्षेत्रों में भी सफलता पूर्वक काश्त किये जा सकते हैं। अन्य राज्यों के साथ-साथ जम्मू कश्मीर के जम्मू संभाग के किसानों के लिए एरोमा मिशन वरदान साबित हो सकता है।  मिशन के अंतर्गत समय-समय पर परामर्श की व्यवस्था है, सम्बन्धित वैज्ञानिकों एवं उद्योगपतियों के साथ मुलाक़ात करवाई जा सकती है। उत्पादकता एवं मूल्य सुधार  के भरपूर प्रयत्न होंगे ।  पौध प्रजनन, आसवन तथा गुणत्व परीक्षण में कौशल विकास का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा और इन उत्पादों से हर्बल प्रोडक्ट्स तैयार करने की विधी भी सिखलाई जाएगी। इससे रोज़गार एवं आय के साधन बढ़ाने में विशाल संभावनाएं है।

(साभार: वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद् - आई..आई. आई.एम्म जम्मू के एरोमा मिशन - २०१८ प्रकाशन से अनुवादित कुछ अंश। अनुवाद कर्ता  - सी.एम्म. शर्मा. )

 

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