शिकायत
हिन्दू से शिकायत है "क्यों अब तक हिन्दू बना नहीं?"
मुस्लिम से भी यही प्रश्न है "क्यों वह मुस्लिम बना नहीं:"
क्यों हिन्दू ज्ञान गंवा बैठा? क्यों मुस्लिम सोच गंवा बैठा?
क्यों मानव 'मानव' बना नहीं? क्यों मन मंदिर में दया नहीं ?
क्यों आदम-खोर बने हैं अब सब ? कुदरत का सम्मान क्यों नहीं ?
खेत और खलिहान मिटाए, पेड़ों का भी मान क्यों नहीं?
भूख बढ़ी इतनी है क्यों अब? निर्बल का अधिकार क्यों नहीं?
नीर आँख से सूख गया क्यों? जीवन का सत्कार क्यों नहीं ?
ईश्वर के सम्मान में हमने ऊँचे - ऊँचे महल बनाए,
सोने-चाँदी के गहनों से, कर्ता के रूप अनेक सजाए।
फिर भी अबलाएं रोती हैं, बच्चों का अपहरण हो रहा,
निर्धनता मुँह खोल के बैठी, सड़कों पर इंसान सो रहा।
उठो अब अपने धर्म को जानो, सेवा के सन्देश को मानो।
प्रेम करो उसकी रचना से, वैर-भाव हिंसा को त्यागो।
उस असीम की शक्ति का कुछ मान करो, कुछ ध्यान करो,
इन शोषित, दीन दुखी देहों में खुदा छिपा है, वह पहचानो।
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