जय जय क्षीर भवानी माता
जय जय क्षीर भवानी माता,
जय तुल - मूल निवासिनी माता,
कश्यप क्षेत्र विहारिणी माता,
जय जय क्षीर भवानी माता।
आज जगत सब व्यथित हुआ है?
कूप ह्रदय का तृषित हुआ है?
ज्ञान की झड़ी लगा मेरी माता,
जय जय क्षीर भवानी माता।
रोग, द्वेष, भय, लोभ, घृणा का
धुआं क्रोध संग घटा - टोप है,
ईर्ष्या, काम, मोह, मद वाला
रावण रास्ता रोक रहा है।
आज विवेक विवश है माता,
पवन पुत्र की याद पड़ी है,
तुम अनादि और सर्व व्याप्त हो
तेरी सृष्टि तेरी शरण पड़ी है ।
हे माँ ! तेरे कई वर्ण हैं
अब चण्डी बन दुष्ट संहारो,
हनुमद के संग अमित रूप ले
भक्तों के घर - घर में विराजो ।
दूर करो माँ कष्ट हमारे ,
दशमुख का संहार करो माँ ,
धर्म ध्वजा स्थापित हो जाए,
निर्मल, शुभ वर जन को दो माँ।
निर्मल मति, दर्शन दो माता,
त्रिपुर सुंदरी! वर दो माता,
रागनिया, तेरी जय हो माता ,
जय जय क्षीर भवानी माता।
जय जय क्षीर भवानी माता,
जय तुल - मूल निवासिनी माता,
कश्यप क्षेत्र विहारिणी माता,
जय जय क्षीर भवानी माता।
- (शारदा लाल, भद्रवाह )
जय जय क्षीर भवानी माता,
जय तुल - मूल निवासिनी माता,
कश्यप क्षेत्र विहारिणी माता,
जय जय क्षीर भवानी माता।
आज जगत सब व्यथित हुआ है?
कूप ह्रदय का तृषित हुआ है?
ज्ञान की झड़ी लगा मेरी माता,
जय जय क्षीर भवानी माता।
रोग, द्वेष, भय, लोभ, घृणा का
धुआं क्रोध संग घटा - टोप है,
ईर्ष्या, काम, मोह, मद वाला
रावण रास्ता रोक रहा है।
आज विवेक विवश है माता,
पवन पुत्र की याद पड़ी है,
तुम अनादि और सर्व व्याप्त हो
तेरी सृष्टि तेरी शरण पड़ी है ।
हे माँ ! तेरे कई वर्ण हैं
अब चण्डी बन दुष्ट संहारो,
हनुमद के संग अमित रूप ले
भक्तों के घर - घर में विराजो ।
दूर करो माँ कष्ट हमारे ,
दशमुख का संहार करो माँ ,
धर्म ध्वजा स्थापित हो जाए,
निर्मल, शुभ वर जन को दो माँ।
निर्मल मति, दर्शन दो माता,
त्रिपुर सुंदरी! वर दो माता,
रागनिया, तेरी जय हो माता ,
जय जय क्षीर भवानी माता।
जय जय क्षीर भवानी माता,
जय तुल - मूल निवासिनी माता,
कश्यप क्षेत्र विहारिणी माता,
जय जय क्षीर भवानी माता।
- (शारदा लाल, भद्रवाह )