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शनिवार, 6 अक्टूबर 2012

रक्षा करो 

रक्षा करो, रक्षा करो।
रक्षा करो, रक्षा करो।
रघुपति मेरे राजाराम,
रक्षा करो।।

बख्शो मुझे, बख्शो मुझे।
बख्शो मुझे, बख्शो मुझे।
बख्शो दुर्व्यस्नों से बख्शो मुझे।

मेरा ह्रदय है अस्थिर बहुत,
न जाने कहाँ जाए दृष्टि बिखर।
मुझे डाल दो साधना की डगर।
रक्षा करो, रक्षा करो।।

रक्षा करो, रक्षा करो;
रघुपति मेरे राजाराम,
रक्षा करो।।

स्वाधीन हो मेरे मन का भ्रमर,
कभी  घुट के तड़पे न परबस बन कर।
हनुमान भेजो, जला दो नगर,
गिरा दो ये ऊँचे अहम् के शिखर।
सिया-राम भक्ति का वरदान दो,
रक्षा करो, रक्षा करो।।

रक्षा करो, रक्षा करो,
रघुपति मेरे राजाराम,
रक्षा करो।।

यह जीवन न जाने कहाँ से चला,
न जाने कहाँ तक चला जाएगा।
मिले राह में कौन, बिछ्डेगा कौन,
कहाँ शब्द उभरेंगे, कब होगा मौन।
वरद हस्त से मेरी रक्षा करो,
रक्षा करो, रक्षा करो।।

रक्षा करो, रक्षा करो,
रघुपति मेरे राजाराम,
रक्षा करो।।
                                (20-10-2011)

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