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शनिवार, 14 जुलाई 2018

स्वच्छता अभियान -
स्वच्छ  भारत  का  निर्माण
 
यह  चाहते तो  हैं  सभी  माहौल  अच्छा  चाहिये।
हर  गाऊँ  अच्छा  चाहिये, हर  शहर अच्छा  चाहिये।।
सुंदर  गली  बाज़ार  हो , सुंदर नदी  तालाब  हो.
सुंदर  गगन ,  सुंदर  धरा , सुंदर  प्रभा  का  ख़्वाब  हो ।।
है  मगर  कुछ  और  भी  जो  सब  जनो  में  चाहिये।
 चाह  केवल  स्वच्छता  की  हो , प्रयत्न  भी  चाहिये।।
हैं  जो  यह  सब  जानते , उनसे   मेरी  यह अर्ज़  है।
अपने  घरों  की  छत  के  नीचे  देखें  कैसी  फ़र्श  है।।
साफ़ आँगन  है  हमारा , साफ़  पिछवाड़ा  है  क्या।
घर  के  चारों  ओर  रहता  पेड़ों  का  पहरा  है  क्या।।
है अगर  दामन  हमारा  मैल  से  लिपटा  नहीं।
मन  हमारा  द्वैष  के  दुर्भाव  से  जकड़ा  नहीं।।
फिर  कहाँ  रोकेगा  कोई  हमको  बढ़ने  से  कभी।
स्वच्छ  पर्यावरण  के  हित  चल  पड़ें  आगे  सभी।।
संकल्प  लें  हर  वर्ष  हम  दो - चार  पौधे  रोप  दें।
जंगलों की दुर्दशा जो हो ही वह रोक  दें।।
फूल - फल  के  पेड़  रोपें वृक्ष छायादार  हों।
दो  तरफ  सड़कों  के  जैसे  सब्ज़  पहरेदार  हों।।
लहलहाते  खेत  हों  और झूमती  सी  ब्यार  हो।
स्वच्छ  पर्यावरण  में  रमणीक घर  तैयार  हों।।
पेड़  पोधों  की  हिफ़ाज़त  से  हमारा  प्यार  हो।
उस  प्रभु  की  भेंट  को  पाने  के  हम  हक़दार  हों।।
मैल  और  कचरे  की  शुद्धी  की  नई  तकनीक  हो।
शीघ्र  ही अब  स्वच्छ  भारत  की  नई  तामीर  हो।। 
 

कुछ सीखो

केले के छिलके को भैया रस्ते में न फेंको,
इस पर से कोई फिसलेगा उसको भी तो देखो।
वहां के सारे लोग हंसेंगे, उसको देंगे ताना ,
चलने की  जो शिक्षा चाहिए, तुम फौजी बन जाना।
बेचारा तो उठ न सकेगा, कहेगी पीड़ा "चीखो"
लोग वहाँ  पर यही कहेंगे "चलना तो भैया सीखो"
मुँह पीला कर के हँस  देगा, उठेगा लाज के मारे,
कहेगा "तुम सब सच्चे हो, हैं सारे दोष हमारे"।
खून का घूँट पियेगा मन में, भावुक हो रोने को,
नहीं सहारा देगा फिर भी उसे खड़ा होने को।
स्वयं पूछ लो ह्रदय से अपने, रहा है क्या कहने को,
मेरी तरह ही कहोगे तुम भी सभी से यह कहने को,
केले के छिलके को भैया रस्ते में न फेंको,
इस पर से कोई फिसलेगा उसको भी तो देखो"। 

शुक्रवार, 13 जुलाई 2018

किसानों के मित्र और हमेश-बहार कृषि सलाहकार देवेंद्र नाथ मेहता

किसानों के मित्र और हमेश-बहार कृषि सलाहकार देवेंद्र नाथ मेहता

जम्मू शहर में जब आप पाटा बोहड़ी चौक से कोई आधा किलोमीटर मढ़ की ओर चलें तो सड़क के दाहिनी ओर एक छोटी सी दुकान में किसान लोग आते, जाते दिखेंगे। बोर्ड पर अंग्रेजी में लिखा है किसान इनपुट्स स्टोर; सीड एंड पेस्टीसाइड्स, ; हेल्पलाइन - ९६८२५७६१३१) और दूकान में कुछेक लोगों से चर्चा में व्यस्त मिलेंगे आज के देहात सन्देश व्यक्तित्व देवेंद्र नाथ मेहता।

श्री मेहता जाने-माने कृषि विस्तार विशेषज्ञ हैं जिन्होंने अभी तक के अपने जीवन के लगभग ७६ अनमोल वर्षों में से ३४ कर्मठ वर्ष राज्य सरकार के कृषि विभाग में रह कर किसानों की सेवा में लगाए और आज इस ७६ वर्ष की आयु में भी निजी तौर पर व्यापारी कम और बहुतया मार्गदर्शक बन कर किसानों की सेवा में लगे हुए हैं। कृषि उनका जनून है और कृषक उनकी प्रेरणा है। इस अवस्था में एक सरकारी कर्मचारी सेवानिवृत्त हो कर विश्राम करना ज़्यादा पसंद करता है परन्तु मेहता साहिब हैं कि उन्नत कृषि और समृद्ध किसान के लिए किसानों के साथ ही अपने अनुभव, अपनी विशेष्ज्ञता, उन्नत बीज, उत्तम द्वाईयें और अपने समय का सदुपयोग करना चाहते हैं। गजनसू-मढ़ क्षेत्र में कृषि विस्तार और प्रसार में वे अभी भी पूर्णतया समर्पित हैं।

ऐसा भी नहीं है कि दूकान पर बैठ कर वे अपने ज्ञान और खेती योग्य इनपुट्स को वे किसानों में मुफ्त में ही बांटते हैं। उनका कहना है कि वे यथा संभव न्यूनतम दाम पर अपने परामर्श के साथ किसानों को खेती के व्यवसाय में सशक्त करते हैं जिससे कम कीमत पर अधिक से अधिक फसल उत्पादन हो सके और  किसान की आय बढ़ सके। इस किसान इनपुट्स स्टोर; सीड एंड पेस्टीसाइड्स; (हेल्पलाइन -- ९६८२५७६१३१) से उन्हें सम्मानजनक आमदनी भी हो जाती है।

श्री देवेंद्र नाथ मेहता का जन्म जम्मू के साम्बा जिला में १२-०५-१९४२  में हुआ। कृषि स्नातक डिग्री उन्होंने आर. एस. पुरा  से  वर्ष १९६७-६८  में प्राप्त की।  २१ जून १९६८ को  उन्होंने कृषि विभाग में एग्रीकल्चर इंस्पेक्टर बसोहली  के पद पर नौकरी ज्वाइन की। कृषि विभाग के तर्कहीन सेवा नियमों के कारण अन्य बहुत से गज़ेटेड कृषि अधिकारियों की तरह उन्हें केवल दो पदोन्नतियाँ ही प्राप्त हुईं। बहुत से अधिकारियों को तो एक पदोन्नति भी प्राप्त नहीं हुई। इस कारणवश पहले तो वर्ष १९७२ में एग्रीकल्चर प्रोफेशनल्स को वेटरिनरी डॉक्टर के समकक्ष करने की मांग को सफलता से १९७४ में मनवाने हेतु हरताल में भाग लिया और फिर एग्रीकल्चर टेक्नोक्रैट फेडरेशन (ऐ.टी.एफ.) के झंडे तले मेहता  जी की अगुआई में वर्ष १९९२ में ५७  दिन लम्बी कृषि टेक्नोक्रैट्स की हरताल भी चली परन्तु दुर्भाग्य से उस बार सरकारी आश्वासनों पर ही समाप्त हो गई।  मेहता साहिब जम्मू क्षेत्र के साथ न्याय की मांग करने वाले उस समय के आंदोलनकारी छात्रों में से हैं जिन में से १६ अक्टूबर १९६६ के चार शहीदों  की  यादगार गवर्नमेंट गाँधी मेमोरियल साइंस कॉलेज के मुख्य फाटक के सामने संजोकर रखी हुई है। श्री मेहता  असिस्टेंट डायरेक्टर एनफोर्समेंट के पद से ३१-५--२०००  को सेवानिवृत्त हुए। 

आजकल के दौर में जब कि पर्याप्त संख्या में सरकारी नौकरिऐं उपलब्ध नहीं हो रहीं और पढ़े-लिखे नवयुवक और युवतियों को ईमानदार और आदर योग्य कारोबार की आवश्यकता ज़्यादा से ज़्यादा महसूस होती जा रही है तो मेहता साहिब अपने काम से यह सन्देश देना चाहते हैं कि कृषि क्षेत्र में व्यवसाय की अभी बहुत सी सम्भावनाएं हैं जिन्हें निष्ठा पूर्ण तरीके से तलाशना चाहिए और अपनाना भी चाहिए। हम उनकी लम्बी और स्वस्थ आयु की कामना करते हैं। 

बुधवार, 11 जुलाई 2018

एरोमा मिशन - सुगंध युक्त पौधों की खेती, प्रसंस्करण,मूल्य संवर्धन एवं विक्रय द्वारा ग्रामीण स-शक्तिकरण के प्रयास

एरोमा मिशन - सुगंध युक्त पौधों की खेती, प्रसंस्करण,मूल्य संवर्धन एवं विक्रय द्वारा ग्रामीण स-शक्तिकरण के प्रयास

भारत की वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद् पिछले छह दशक से देश सुगंध आधारित उद्योग में उपयोग होने वाले आवश्यक तेलों को विकसित करने और बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इस के फलस्वरूप हमारे उद्योगों, किसानों और उद्यमिओं के रोज़गार पाने और बढ़ाने के अवसरों में सतत वृद्धी होती रही है।  परिषद् की विभिन्न इकाईयां कुछ महत्त्वपूर्ण सुगंध युक्त फसलों की उन्नत किस्मों के विकास एवं आविष्कार करने में सफल रही हैं।  परिषद् की प्रयोगशालाएं अब तक एकाकी रूप से ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सुगंध क्षेत्र में प्रमुख योग-दान दे रही थीं।  परन्तु अब ग्रामीण अर्थ--व्यवस्था, बाजार की गतिशीलता और विकास के अवसरों को सही तरीके से उपयोग में लाने के लिए निर्णायक कदम उठाये जा रहे हैं।  करगत लिए हुए एरोमा मिशन द्वारा देश भर में ये कदम ऐसा परिवर्तन लाने में सक्षम हैं जिन से पर्याप्त मात्रा में सुगंध युक्त पौधों के उत्पादन से मूल्य संवर्धन तथा विपणन तक के कार्यक्रम एक कड़ी के रूप में जुड़ जायेंगे।

एरोमा मिशन का लक्ष्य है निम्नलिखित उद्देश्यों को प्राप्त करना :

१. देश के विभिन्न भागों के विशेष रूप से वर्षा आधारित और क्षारीय भूमि पर ५५०० हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्रफल में नगद आय देने वाले सुगंध युक्त पौधों को सुरक्षित खेती के अंतर्गत लाना ,
२. देश के किसानों तथा उत्पादकों को आसवन (डिस्टिलेशन) एवं मूल्य संवर्धन के लिए आवश्यक  तकनीक और आधारभूत सुविधा के लिए सहायता उपलब्ध करवाना ,
३. किसानों तथा उत्पादकों को उनके उत्पाद का सही दाम दिलवाने के लिए खरीद की असरदार व्यवस्था उपलब्ध करवाना ,
४. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार एवं अर्थव्यवस्था के अनुरूप पौधों से प्राप्त आवश्यक तेलों और सुगंध के अंश का मूल्य संवर्धन करना।

इस मिशन क्व केंद्र में वे फसलें हैं जिनसे आवश्यक तेल व सुगंधित रसायन प्राप्त होते हैं।  इन पर शोध और विकास कार्य सुगंध, स्वाद और खुशबू के अंतर्राष्ट्रीय माप-दंड पर खरा उतरने की दृष्टि से किये जाते हैं। वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद् अपनी प्रमुख प्रयोगशालाएं का अन्य सम्बंधित राजकीय एवं निजी प्रयोगशालाओं से समन्वय बिठाएगी और विकसित तकनीक को किसान एवं उद्योग जगत के हित में सांझा करेगी।  विज्ञान और तकनीक को आरम्भ से अंत तक उपभोक्ता, उद्योग, समाज और किसान तक पहुंचाने का यह प्रयास है जिस से व्यापार के अवसर, ग्रामीण विकास, और गुणवत्ता सुधार के लक्ष्य प्राप्त हो सके।

५५०० हेक्टेयर क्षेत्रफल में औषधीय एवं सुगंध युक्त पौधों की कॉस्ट से लगभग ६०,००० हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र का इस मिशन से जुड़ने का अनुमान है।  इससे बंजर पड़ी भूमि का भी सदुपयोग होगा और जंगली तथा चरने वाले पशुओं से फसलों का भी बचाओ होगा। किसान की आय भी बढ़ेगी।

अभी तक एरोमा मिशन के अंतर्गत जिन ९ बहुमूल्य सुगन्धित  पौधों की वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद् - आई..आई. आई.एम्म द्वारा २००० हेक्टेयर क्षेत्र में रोपाई के लिए कार्यक्रम तैयार किया गया है , वे हैं:
१ लेमन ग्रास (हाइब्रिड - सी. के. पि. २५; सी. पी. के. एफ २ - ३८),
२. रोसा ग्रास (आर.आर.एलल- जे; सी.ऍन ५ ), हिमरोज़ा (आई..आई. आई.एम्म - जे; सी. के. १०)
३. लैवेंडर लैवेंडुला ओफ्फिशनलिस (आर. आर. एल.-१२ )
४. रोज़मेरी रोज़मेरियांस ओफ्फिशनलिस
५. जम्मू मोनरडा - आई..आई. आई.एम्म - जे, एम्.सी. ०२)
६. सैल्विया स्क्लेरिअ
७. मेंथा लोंगीफोलिआ (आर.आर.एल .-जे,, एम..एल. ४ ), मेंथा पिपेरेटा (आर.आर.एल.-जे,  एम.टी ९४)
८. ओसिमम स्पीशीज ( आर.आर.एल .-औ जी-१४.; आर.आर.एल.-औ.बी.-१५.), और
९. पैलार्गोनियम ग्रावेओलेन्स जेरेनियम पी.जी.-आई..आई. आई.एम्म १०१ )

ये सभी पौधे सिंचित क्षेत्र में सही चलते हैं परन्तु रोसा ग्रास और पैलार्गोनियम वर्षा आधारित क्षेत्रों में भी सफलता पूर्वक काश्त किये जा सकते हैं। अन्य राज्यों के साथ-साथ जम्मू कश्मीर के जम्मू संभाग के किसानों के लिए एरोमा मिशन वरदान साबित हो सकता है।  मिशन के अंतर्गत समय-समय पर परामर्श की व्यवस्था है, सम्बन्धित वैज्ञानिकों एवं उद्योगपतियों के साथ मुलाक़ात करवाई जा सकती है। उत्पादकता एवं मूल्य सुधार  के भरपूर प्रयत्न होंगे ।  पौध प्रजनन, आसवन तथा गुणत्व परीक्षण में कौशल विकास का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा और इन उत्पादों से हर्बल प्रोडक्ट्स तैयार करने की विधी भी सिखलाई जाएगी। इससे रोज़गार एवं आय के साधन बढ़ाने में विशाल संभावनाएं है।

(साभार: वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद् - आई..आई. आई.एम्म जम्मू के एरोमा मिशन - २०१८ प्रकाशन से अनुवादित कुछ अंश। अनुवाद कर्ता  - सी.एम्म. शर्मा. )

 

मंगलवार, 7 अक्टूबर 2014

शिकायत

 

हिन्दू से शिकायत है "क्यों अब तक हिन्दू बना नहीं?"

मुस्लिम से भी यही प्रश्न है "क्यों वह मुस्लिम बना नहीं:"

क्यों हिन्दू ज्ञान गंवा बैठा? क्यों मुस्लिम सोच गंवा बैठा?

क्यों मानव 'मानव'  बना नहीं? क्यों मन मंदिर में दया  नहीं ?

 

क्यों आदम-खोर बने हैं अब सब ? कुदरत का सम्मान क्यों नहीं ?

खेत और खलिहान मिटाए, पेड़ों का भी मान क्यों नहीं?

भूख बढ़ी इतनी है क्यों अब? निर्बल का अधिकार क्यों नहीं?

नीर आँख से सूख गया क्यों? जीवन का सत्कार क्यों  नहीं ?

 

ईश्वर  के सम्मान  में हमने ऊँचे - ऊँचे महल बनाए,

सोने-चाँदी के गहनों से, कर्ता के रूप अनेक सजाए।         

फिर भी अबलाएं रोती हैं, बच्चों का अपहरण हो रहा,

निर्धनता मुँह खोल के बैठी, सड़कों पर इंसान सो रहा।

 

उठो अब अपने धर्म को जानो, सेवा के सन्देश को मानो। 

प्रेम करो उसकी रचना से, वैर-भाव हिंसा को त्यागो।

उस असीम की शक्ति का कुछ मान करो, कुछ ध्यान करो,

इन शोषित, दीन दुखी देहों में खुदा छिपा है, वह पहचानो। 




 

नया संकल्प 

 

दुनिया वालों से कह दो कि  अब वे चले गए हैं दिन 

आते थे जब हमलावर और होता था चौहाण पतन। 

 

नहीं बनेंगे  सोने की चिड़िया , व्याध से लोहा लेना है ,

देश-द्रोही को दण्डित कर के माँ को गौरव देना है । 

 

स्वयं जियो और जीने दो के सिद्धांत को देंगे कभी जो ठेस,

उनको भूमण्डल में हमने  नहीं कहीं रखना है शेष। 

 

संसार से जाओ यह कह दो, "अभिमन्यु नहीं मरेगा अब,

एक-एक क्या, सात व्यूह हों जीत के ही दम लेगा अब। 

 

सोने की चिड़िया नहीं बनेंगे, बनेंगे मानवता की लाज,

मानव की हम मदद करेंगे दानव को चीरेंगे आज। 

कुछ सीखो 


केले के छिलके को भैया राहों में न फेंको,

इन पर से कोई फिसलेगा उसको भी तो देखो।

 

वहां के सारे लोग हंसेंगे, उसको देंगे ताना ,

चलने की  जो शिक्षा चाहिए, तुम फौजी बन जाना। 

 

बेचारा तो उठ न सकेगा, कहेगी पीड़ा "चीखो"

लोग वहाँ  पर यही कहेंगे "चलना तो भैया सीखो"

 

मुँह पीला करके हँस  देगा, उठेगा लाज के मारे,

कहेगा "तुम सब सच्चे हो, हैं सारे दोष हमारे"।

 

खून का घूँट पियेगा घायल, भावुक हो रोने को,

नहीं सहारा देगा कोई उसे खड़ा होने को। 

 

स्वयं पूछ लो ह्रदय से अपने, रहा है क्या कहने को,

मेरी तरह समझ लो तुम भी सभी को यह कहने को,

 

केले के छिलके को भैया राहों में न फेंको,

इस पर से कोई फिसलेगा उसको भी तो देखो"। 


सोमवार, 6 अक्टूबर 2014

आह्वान

 

मानवता की हवा बहे,

ये बंटवारे सब ढह  जाएं,

नफरत की आंधी ठंडी हो,

आओ सब मिल कर यत्न  करें। 

 

हम सभ्य बनें, सब वीर बनें,

और लाज रखें मर्यादा की,

सूरज सा रूप खिले भारत का,

मानवता का जाप करें। 

 

हम सभी सत्य व्रत धारी हों,

सब  प्रेम के अडिग पुजारी हों,

अमृत की बरसात करें,

सौहार्द के सब जन अनुचर हों। 

 

सब खिलें यहाँ "मत" पंकज बन कर,

गुण - ग्राहक जग से आएं ,

हम सुख बांटें, हम खुशियाँ  दे दें,

ज्ञान क्षुधा अब तृप्त  करें। 

 

हम मूल मन्त्र प्रगति का धारें, 

मिल-जुल कर सहयोग करें,

सब कर्म-यज्ञ में शामिल हो कर,

देश की विपदा दूर करें।