लॉक डाउन का सदुपयोग
साधारणतयः गुल-दाउदी के फूल अक्टूबर के बाद खिलना आरम्भ करते हैं और इसकी कई प्रजातियें फरवरी - मार्च तक खिलती रहती हैं, परन्तु मुझे इस बार विशेष प्रसन्नता हो रही है कि अप्रैल माह के जाते - जाते भी अपने घर के छोटे से बगीचे में ये पौधे बैगनी और पीले रंग के पुष्पगुच्छ दे रहे हैं।
आज - कल लॉक डाउन का समय चल रहा है और घर से बाहिर निकलना बंद है, तो जो समय नित्यकर्म पश्चात दूरदर्शन पर रामायण, महाभारत, चाणक्य और समाचार देखने के बाद मिलता है वह अधिकतर प्रकृति के साथ जुड़ कर बिताने में ही गुज़रता है। यह काम मनोरंजक भी है, स्वास्थ्य-वर्धक भी और शाक-सब्ज़ी उगाने पर आहार भी प्रदान करता है और बाज़ार से हर बार सब्ज़ी खरीद कर लाने की प्रवृति पर भी छोटा सा अंकुश भी लगाता है। मिर्च और पुदीना के पौधे लगे हों तो खाना सु-स्वादु भी हो जाता है।
मैंने अपने बगीचे में अभी श्वेत और लाल फराशबीन (कन्टेंडर) के पौधे बोए हैं जिनमे फूल और फलियां पड़नी शुरू हो गई हैं। भिंडी (संकर/हाइब्रिड) के पौधे ज़मीन से बाहिर निकल चुके हैं । टमाटर हाइब्रिड के १४ - १५ पौधे, हाइब्रिड मिर्च के ५ - ६ पौधे और बैंगन (उन्नत प्रजाति) के १० - १२ पौधे भी लगाए हुए हैं। इनके अतिरिक्त कद्दू के ६ पौधे सावधानी पूर्वक मिट्टी समेत प्रत्यारोपित करके लगाए हैं।
बगीचे की सुंदरता के लिए गज़ीनिया, डहेलिया, गुलाब, फ्लॉक्स, के फूल और कुछ गमलों में सजावटी पौधे भी लगे हुए हैं। इनके छायाचित्र लेने में भी कुछ समय सकारात्मक ढंग से उपयोग हो जाता है। इन्हें मोबाइल फ़ोन पर साझा करने से अपनी जानकारी भी बढ़ती है और अपने संपर्क में मित्र-जनों और छोटे-बड़ों की भी।
ये गतिविधियां निश्चय ही हमें कुछ सीमा तक आत्मनिर्भर बनाने में सहायता करती हैं। हम सभी लोग अपने पास जितनी भी जगह है, चाहे बगीचे में, घर की छत पे, बरामदे में अथवा छज्जे में, थोड़ी बहुत सब्ज़ी, औषधीय और सजावटी पौधे, सुगन्धयुक्त पौधे सुविधानुसार उगाएं तो समय, स्थान और साधन का सदुपयोग होगा। आत्मनिर्भरता की ओर यह एक प्रशंसनीय कदम होगा जिसकी ओर प्रधानमन्त्री ने संकेत भी किया है।
साधारणतयः गुल-दाउदी के फूल अक्टूबर के बाद खिलना आरम्भ करते हैं और इसकी कई प्रजातियें फरवरी - मार्च तक खिलती रहती हैं, परन्तु मुझे इस बार विशेष प्रसन्नता हो रही है कि अप्रैल माह के जाते - जाते भी अपने घर के छोटे से बगीचे में ये पौधे बैगनी और पीले रंग के पुष्पगुच्छ दे रहे हैं।
आज - कल लॉक डाउन का समय चल रहा है और घर से बाहिर निकलना बंद है, तो जो समय नित्यकर्म पश्चात दूरदर्शन पर रामायण, महाभारत, चाणक्य और समाचार देखने के बाद मिलता है वह अधिकतर प्रकृति के साथ जुड़ कर बिताने में ही गुज़रता है। यह काम मनोरंजक भी है, स्वास्थ्य-वर्धक भी और शाक-सब्ज़ी उगाने पर आहार भी प्रदान करता है और बाज़ार से हर बार सब्ज़ी खरीद कर लाने की प्रवृति पर भी छोटा सा अंकुश भी लगाता है। मिर्च और पुदीना के पौधे लगे हों तो खाना सु-स्वादु भी हो जाता है।
मैंने अपने बगीचे में अभी श्वेत और लाल फराशबीन (कन्टेंडर) के पौधे बोए हैं जिनमे फूल और फलियां पड़नी शुरू हो गई हैं। भिंडी (संकर/हाइब्रिड) के पौधे ज़मीन से बाहिर निकल चुके हैं । टमाटर हाइब्रिड के १४ - १५ पौधे, हाइब्रिड मिर्च के ५ - ६ पौधे और बैंगन (उन्नत प्रजाति) के १० - १२ पौधे भी लगाए हुए हैं। इनके अतिरिक्त कद्दू के ६ पौधे सावधानी पूर्वक मिट्टी समेत प्रत्यारोपित करके लगाए हैं।
बगीचे की सुंदरता के लिए गज़ीनिया, डहेलिया, गुलाब, फ्लॉक्स, के फूल और कुछ गमलों में सजावटी पौधे भी लगे हुए हैं। इनके छायाचित्र लेने में भी कुछ समय सकारात्मक ढंग से उपयोग हो जाता है। इन्हें मोबाइल फ़ोन पर साझा करने से अपनी जानकारी भी बढ़ती है और अपने संपर्क में मित्र-जनों और छोटे-बड़ों की भी।
ये गतिविधियां निश्चय ही हमें कुछ सीमा तक आत्मनिर्भर बनाने में सहायता करती हैं। हम सभी लोग अपने पास जितनी भी जगह है, चाहे बगीचे में, घर की छत पे, बरामदे में अथवा छज्जे में, थोड़ी बहुत सब्ज़ी, औषधीय और सजावटी पौधे, सुगन्धयुक्त पौधे सुविधानुसार उगाएं तो समय, स्थान और साधन का सदुपयोग होगा। आत्मनिर्भरता की ओर यह एक प्रशंसनीय कदम होगा जिसकी ओर प्रधानमन्त्री ने संकेत भी किया है।
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