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रविवार, 11 नवंबर 2018

माँ के बेटे

माँ के बेटे

वह देखो माँ के बेटे सरहदों पर जान लुटाते हैं।
मिटा कर अपनी हस्ती को वतन की शान बढ़ाते हैं।।
वह देखो माँ के बेटे सरहदों पर जान लुटाते हैं।२।
 
हमारे कल की चिंता उनके दिल की धड़कनों में है,
वतन के माँ, बहिन, बेटी की रक्षा उनका जीवन है।
इसी के वास्ते वे मौत से लड़ने को जाते हैं,
समर्पण अपना जीवन कर हमें जीवन दिलाते हैं।।
वह देखो माँ के बेटे सरहदों पर जान लुटाते हैं।२।
 
हमें दे जीत का उपहार सेना कर रही उपकार,
अपना फ़र्ज़ हम समझें करें दृढ देश का आधार।
मेहनत हो कड़ी खेतों, स्कूलों, कारखानों में,
बढ़ा दें चौकसी सीमा के अंदर और सरहद पे ।।
सिपाही की विरासत की सुरक्षा, मान हो निश्चित,
तभी ज़िंदा रहेगा हिन्द, ज़िंदा हर जवान होगा।
इसी के वास्ते रणबांकुरे सम्मान पाते हैं,
वह देखो माँ के बेटे सरहदों पर जान लुटाते हैं।।
वह देखो माँ के बेटे सरहदों पर जान लुटाते हैं।२।   

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